जरासंध Facts of Mahabharata Jarasandha in Hindi

जरासंध का नाम तो सभी जानते होंगे, जो नहीं जानते उन्हें हम बता दें, कि जरासंध एक महारथी व बलशाली राजा था, जिसके चर्चे दूर दूर तक विख्यात थे।

जरासंध के बारे में आज हम आपको कुछ रोचक जानकरी देंगे-

जरासंध भगवान शंकर के परम भक्तों में गिना जाता था।

जरासंध की दो बेटिया थी, और उन दोनों की शादी उसने मथुरा के राजा कंस के साथ की थी। इस हिसाब से वह कंस का ससुर था।

शिशुपाल जरासंध के सबसे प्रिय सेनापति थे।

कंस की मौत का बदला लेने के लिये जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया था, लेकिन 17 के 17 बार वह अपने प्रयास में असफल हो गया।

जरासंध बहुत ही क्रूर था। उसके डर से कई लोगो ने अपने राज्य त्याग दिये थे।

जरासंध के अनुसार कोई भी अगर 100 राजाओ को बंदी बनाकर बलि चढ़ा देता था, तो वह चक्रवर्ती सम्राट माना जाता था, इसी उदेश्य से जरासंध ने 86 राजाओं को एक पहाड़ी गुफा में कैद कर रखा था।

मगधदेश के बृहद्रथ नामक राजा के दो पत्नी थी, लेकिन किसी से भी उन्हें कोई संतान नहीं थी। तब उन्होंने चण्डकौशिक नाम के एक महात्मा से संतान प्राप्ति की दुआ की। तब उन्होंने उसे एक फल दिया। राजा ने वह फल अपनी दोनों पत्नियो को आधा आधा खिला दिया जिसके कारण दोनों को आधा आधा एक बालक पैदा हुआ। दोनों रानियों ने आधा आधा बच्चा देखकर दोनों टुकडो को घबराकर बाहर फेख दिया। उस समय एक राक्षसी ने उन दोनों टुकड़ो को देख लिया, और उन्हें जोड़ दिया, जिससे दोनों टुकड़े मिलकर एक बालक बना। जिसका नाम रखा गया जरासंध।

जरासंध नाम इसलिए रखा गया, क्योंकि उस राक्षसी का नाम जिसने उसे जोड़ा था, जरा था, और उसने उसकी संधि की थी।

जरासंध की क्रूरता को देखकर उसे मारना जरुरी हो गया था, जरासंध को मारने के लिये भीम, अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का रूप धारण करके गये थे। परन्तु जरासंध को यह ज्ञात हो गया था, कि ये तीनो ब्राह्मण नहीं हैं, इसीलिए उन्होंने ब्राह्मण का रूप धारण किये श्रीकृष्ण भगवान से अपना वास्तविक परिचय देने को कहा। जरासंध को श्रीकृष्ण भगवान ने तब जाकर अपना वास्तविक परिचय दिया। जरासंध ने जाकर भीम के साथ 13 दिनों तक कुश्ती की, जिसके परिणाम स्वरुप अंत में भीम ने जरासंध को मार दिया।

जरासंध की मृत्यु के बाद उसके पुत्र सहदेव को अभयदान देकर भगवान श्रीकृष्ण मगध का राजपाठ सौप दिया।

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