जंगल का राजा Kids Stories in Hindi

Bachon Ki Kahaniyan

चन्दन वन में पक्षियों की एक सभा चल रही थी। वन में नये राजा का चुनाव होना था, इसलिये वन के सभी जीव जन्तुओ को सभा में बुलाया गया था। सभा में तय होना था, कि वन का नया राजा कौन बनेगा।

राजा बनने के लिए कुछ पक्षी आपस में लड़ने झगड़ने लगे। पक्षियों को आपस में लड़ता देखकर सभा के सबसे बुजुर्ग और अनुभवी मोर ने कहा, ” चन्दन वन का राजा वही बनेगा, जिसके अन्दर काबिलियत होगी, ताकत होगी, सूझबूझ होगी, राजा बनने की सम्पूर्ण योग्यता होगी, और जो सम्पूर्ण चन्दन वन के लोगो को एकजुट रख सकेगा।
मोर की बात सुनकर पशु – पक्षी एक दूसरे को देखने लगे और मोर को बात से सहमत हो गए। तभी वहा उपस्थित एक पक्षी खड़े होकर बोला, ” मैं सबसे शक्तिशाली और ताकतवर हूँ, मेरे अन्दर राजा बनने के सम्पूर्ण गुण हैं, इसलिये मैं वन का नया राजा बनूँगा।

उसकी बात सुनकर तभी एक दूसरा पक्षी खड़े होकर बोला, ” तुमसे ज्यादा शक्तिशाली और ताकतवर मैं हूँ, मैं इस वन के समस्त वन के लोगो को एकजुट रख सकूँगा , केवल मैं ही इस वन के राजा बनने योग्य हूँ।” अपनी अपनी बात कहकर दोनों पक्षी आपस में लड़ने लगे। काफी समय तक जब तय नहीं हो पाया कि राजा कौन बनेगा तब मोर ने उन दोनों से कहा, ” तुम दोनों आपस में कुश्ती लड़ो जो कुश्ती में जीत जायेगा, वही इस चन्दन वन का नया राजा बनेगा।”

दोनों की कुश्ती शुरू हो गयी, पहले वाले पक्षी ने चल कपट से जीत हासिल कर ली और दूसरे पक्षी को कुश्ती में हरा दिया। सभी ने उससे राजा घोषित कर दिया। सभी उस विजयी पक्षी के चारो ओर इकठ्ठा हो गये और उसका गुणगान करने लगे। राजा घोषित हुआ पक्षी खुद पर बहुत गर्व महसूस कर रहा था, और वह चाहता था कि उसके राजा बनने की बात आसपास के सभी पक्षी जान ले। अपने राजा बनने की स्वयं घोषणा करने के लिए वह इठलाता हुआ, पेड़ की सबसे उँची डाल पर जा बैठा, और अकड़ते हुए तेज आवाज में बोला, ” सभी लोग मुझे ध्यान से देख लो आज से मैं इस वन का राजा हूँ। आज से इस वन में वही होगा जो मैं चाहूँगा।” वह अभी बोल ही रहा था, कि तभी ऊपर से एक चील आयी और उसने उसपे झपटा मार दिया और उसे अपनी चोच में दबाके उड़ गयी।

यह देखकर पूरी सभा में हड़कंप मच गया। सभी अपने नए राजा के लिये दुखी होने लगे। तभी पुनः मोर ने बोला तुम सभी दुखी क्यों हो रहे हो, तुम्हे तो खुश होना चाहिये, और अपनी ख़ुशी का जश्न मनाना चाहिये। मोर की बात सुनकर सभी पक्षियों ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा, ” हमें खुश क्यों होना चाहिये, इसमें क्या ख़ुशी की बात है?”
उनकी बात सुनकर मोर बोला, ” तुम सभी ने देखा नहीं राजा बनते ही उसके अन्दर कितना अहंकार आ गया था। वह अपने राजा बनने पर कितना इठला रहा था। अहंकार में वह अपना गुणगान भी खुद ही करने लगा था। क्या एक अहंकारी पक्षी राजा बनकर वन के पक्षियों का भला करेगा?”

हमें खुश होना चाहिये और अपना सौभाग्य समझना चाहिए कि एक अहंकारी राजा से हमें इतनी जल्दी मुक्ति मिल गयी।

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