Sholay Movie Unknown Facts(in Hindi) फिल्म शोले की अनजानी बातें

sholay-picफिल्म शोले की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र हेमामालनी के साथ अधिक रोमांस करने के लिए लाइट ब्वॉय को पैसे देकर अपने सीन बार बार खराब करा देते थे।

फिल्म में गब्बर सिंह ने जो खाकी वर्दी पहनी थी, उसे मुंबई के चोर बाजार से खरीदा था।

पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान गब्बर सिंह ने जो खाकी वर्दी पहनी थी, उसे एक भी बार नहीं धुला गया।

संजीव कुमार ने शोले फिल्म की शूटिंग के कुछ दिनों पहले ही हेमा मालिनी के सामने शादी करने का प्रस्ताव रखा था, परन्तु हेमा मालिनी ने शादी करने से मना कर दिया था।

इस फिल्म की शूटिंग के दौरान जया बच्चन प्रेग्नेंट हो गई थी। जिसके कारण फिल्म को शूट करने में अधिक दिन लग गये।

फिल्म में जय, वीरू और ठाकुर को ट्रेन में सफर करते हुए लड़ते हुए दिखाया गया है, फिल्म के इस सीन को शूट करने में 7 सप्ताह लग गये थे। आज के समय में 7 सप्ताह में एक फिल्म की शूटिंग हो जाती है।

इस फिल्म में ठाकुर के रोल को पहले प्राण को देने पर विचार किया गया था, परन्तु बाद में यह रोल संजीव कुमार को दे दिया गया।

फिल्म में गब्बर के रोल के लिए पहले डैनी को ऑफर दिया गया था, परन्तु डैनी फिरोज खान की फिल्म धर्मात्मा के लिए पहले ही अपना समय दे चुके थे, जिसके कारण डैनी के हाथ से गब्बर का रोल चला गया।

सूरमा भोपाली का किरदार भोपाल के एक वन अधिकारी की जिंदगी से लिया गया है, और यह नाम जावेद ने दिया था।

असल ज़िन्दगी में जय-वीरू नाम के सलीम खान के कॉलेज के समय में दो दोस्त थे।

सलीम खान के ससुर के नाम पर ठाकुर बलदेव सिंह का नाम रखा गया था।

जीपी सिप्पी इस फिल्म के निर्माता थे, और वे 1947 में कराची से बम्बई एक शरणार्थी की तरह खाली हाथ आये थे, लेकिन इस फिल्म ने उनकी किस्मत ही बदल दी, और वो रातो रात अरबपति बन गये।

जीपी सिप्पी के घर पर जब फिल्म सीता और गीता (1972) की शानदार सफलता की पार्टी हुई थी, तभी रमेश सिप्पी के दिमाग में इस फिल्म को बनाने का आईडिया आया था।

मार्च 1973 में इस फिल्म की कहानी को सलीम-जावेद तथा रमेश सिप्पी ने मिलकर लिखना शुरू किया।

इस फिल्म में गब्बर की गुफा और ठाकुर का घर मीलों दूर दिखाया गया है, परन्तु वास्तविक में दोनों पास-पास ही थे।

यह फिल्म बंबई के सिनेमाघर मिनर्वा में लगातार पांच सालो तक चली थी। यह इस फिल्म का एक बड़ा रिकॉर्ड था, और इस रिकॉर्ड को आगे चलकर दिलवाले दुल्हनियां ले जायेगे ने तोड़ा था।

जब यह फिल्म रिलीज हुई तो कुछ फिल्म समीक्षकों ने इस फिल्म की जमकर आलोचना की थी, परन्तु इस फिल्म के ब्लॉकबस्टर होते ही उन सब लोगो के मुँह बन्द हो गये।

बीबीसी ने 1999 में इस फिल्म को ‘फिल्म ऑफ द मिलेनियम’ का खिताब दे दिया।

अनुपमा चोपड़ा ने अपनी किताब ‘शोले: द मेकिंग ऑफ क्लासिक’ में इस फिल्म को हिन्दी सिनेमा का सोना बताया है।

शेखर कपूर ने ‘शोले: द मेकिंग ऑफ क्लासिक’ में कहा है, कि इस फिल्म के जैसी फिल्म भारत में आज तक नहीं बनायी गयी।

जीपी सिप्पी ने कैमरामैन द्वारका दिवेजा के काम से खुश होकर उन्हें फिएट कार गिफ्ट कर दी थी।

हाल ही में बनी फिल्म ‘गब्बर इज बैक’ शोले के किरदार गब्बर पर बनायी गयी है।

यह फिल्म तीन जनवरी 2014 3-डी वर्जन में भी बन चुकी है, इस फिल्म के 3-डी वर्जन का बजट 25 करोड़ था।

फेसबुक पर भी इस फ़िल्म का पेज है, और इस फेसबुक पेज पर 10 लाख से अधिक लाइक है।

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