किसान Short Inspirational Hindi Story on Farmers Life

Inspirational Hindi Story

दोस्तों जय जवान ~ जय किसान यह नारा बचपन से हमें स्कूल में सिखाया जाता है। हम इसे सीखते हैं, और भूल जाते हैं। ऐसा क्यों ? ऐसा माना जाता है, कि जो इंसान कड़ी महेनत और लगन से अपने काम में लगा रहता है. उस इंसान के सपने हमेशा पूरे होते हैं, पर आज जो कुछ मैंने अपनी आँखो से देखा, उसे देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ। मैंने उस इंसान के सपने को टूटते हुए देखा है, जिस इंसान की वजह से हमारे घर में खाने के लिए अनाज आता है, जिसकी वजह से हम पेट भरकर खाना खा पाते है। जी हाँ मैं बात कर रही हूँ भारत के किसान की, जिसके आँखो में बसने वाले सपने एक मिनट में टूट जाते हैं। आज मैं आपको ऐसी कहानी सुनाने जा रही हूँ, जो मैंने अपनी आँखो से देखी, और जिसका दर्द मैने खुद महसूस किया।

एक गांव में एक किसान अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। किसान गरीब था, नौकरी नहीं थी, कुछ जमीन थी, जिसमें अनाज उगाकर अपना गुजारा करता था। इस बार भी किसान और उसकी पत्नी ने पूरी महेनत और लगन से अपने खेतों में काम किया, और उसमें अनाज उगाया। फसल काफी अच्छी हुई, किसान अपनी फसल को देखकर काफी खुश था, खुश होना भी चाहिए, उसकी पूरी साल भर की महेनत थी वो, और उसका आगे का ख़र्चा भी उस फसल से आये पैसों से ही चलना था।

अब वो समय भी आया जिसका उसकी पत्नी और बच्चों को बहुत दिनों से इंतजार था। फसल कटने का समय आ गया। किसान और उसकी पत्नी ने खुद ही पूरी फसल की कटाई की। अब फसल बेचने शहर जाना था।

किसान अगले दिन सुबह 4 बजे उठता है, और नहाधोकर फसल बेचने के लिए शहर जाने के लिए तैयार हो जाता है। किसान बहुत खुश था, किसान के दोनों बच्चे भी जल्दी उठ जाते हैं। किसान अपने मासूम बच्चों के सर पर हाथ फिराते हुए कहता है, आज मैं तुम्हारे पढ़ने के लिए कुछ किताबें लेकर आऊंगा, और पहनने के लिए नए कपडे भी। किसान का बेटा कहता है, ” हाँ पापा आप हमारे लिए पढ़ने को किताबें जरूर लेकर आना, लेकिन कपडे मत लाना। माँ के लिए एक साड़ी लेकर आना, माँ की साड़ी फट गई है, माँ फटी हुई साड़ी में अच्छी नहीं लगती।”

किसान ने अपने बेटे की बात सुनी, और अपनी पत्नी से कहा, ” सुनो! आज मैं तुम्हारे लिए एक साड़ी और घर का कुछ राशन ले आऊंगा। पति की बात सुनकर पत्नी बोली, ” वो सब तो ठीक है, आप अपने पहनने के लिए सबसे पहले जूते ले आना। आपके जूते पूरे फट गए हैं, आप खेत भी नंगे पैर ही चले जाते हैं।”

पत्नी की बात सुनकर पति ने हां में सर हिलाया और चल दिया। किसान मंडी पहुंचता है, मंडी पहुंचकर उसने दुकान वाले से अपने अनाज की कीमत लगाई, तो दुकान वाले ने उसकी कीमत बहुत कम बताई। किसान ने दुकान वाले से कहा, ” भइया ! अनाज की कीमत जरा सही लगाईये, यह तो बहुत कम है। दुकान वाले ने कहा, मंडी में यही रेट चल रहा है, बेचना है, तो बताओ नहीं तो जाने दो।”

किसान बेचारा क्या करता, अनाज तो बेचना ही था, वो अनाज उसी कीमत में बेचकर घर की ओर आने लगता है, उस पैसों से खरीदता भी क्या, जितने उसने सोचे थे, फसल उससे भी कम कीमत में बिकी थी। पूरे रास्ते किसान यही सोचता रहा, इन पैसो में बिजली का बिल देना है, खाद वाले के पैसे भी देने हैं, और खेत में जो पानी दिया उसके पैसे भी देने हैं।

सारे पैसे तो ऐसे ही खत्म हो जाएंगे, फिर बचेगा क्या ?

घर पहुंचा तो बच्चे घर के बाहर ही खड़े मिल गए। पिताजी को देखकर बच्चे जोर जोर चिल्लाने लगे, माँ पिताजी आ गए, और जाकर पिताजी से चिपक गए, और बोले पापा हमारे लिए किताबें लाये। अपने बच्चों की बाते सुनकर वो बोला, ” बच्चों आज दुकान बंद थी, मैं अगली बार जब बाजार जाऊंगा, तब तुम्हारे लिए किताबें लेकर आऊंगा।

पत्नी पति के चेहरे को देखकर समझ जाती है, कि फसल के सही दाम नहीं मिले। पति उससे कहता है, वो मैं तुम्हारी साड़ी भी भूल —– । पत्नी अपने पति को रोकते हुए, बोलती है, वो सब ठीक है, कम से कम आप अपने लिए जूते तो ले ही आते। खेतों में गंदा पानी होता है, और कीड़े मकोड़े भी, आप कब तक नंगे पैर काम करने जाएंगे। यह बोलते हुए, वह अपनी आँखो के आंसू पोछने लगती है। पति की आँखो से भी आंसू छलकने लगते हैं, लेकिन दोनों फिर भी एक दूसरे को दिलासा देते हैं।

वो फिर उस रात खाना खाये बिना ही सो जाते हैं, और फिर अगले दिन एक नयी उम्मीद और आशा के साथ अपने खेतों में काम को जाते हैं।

दोस्तों ये कहानी केवल एक कहानी नहीं है, ये एक सच्चाई है, जिसका सामना एक छोटे और मध्यम वर्ग का किसान हर साल करता है। वो पूरे साल अपने खेतों में मेहनत करता है, और फसल उगाता है, लेकिन जब वो उस फसल को मंडी बेचने के लिए लेकर जाता है, तब वो उसकी कीमत खुद क्यों नहीं लगा पाता ?

हम बाजार एक माचिस भी खरीद कर लाते हैं, तो उसपे भी उसको बनाने वाले ने उसके दाम लिखे होते हैं। फिर क्यों एक किसान अपने साल भर की मेहनत से उगाई गई फसल को अपनी सोची हुई कीमत पर बेच पाता?

जब मंडी में थोड़ी सी भी महंगाई होती है, तब मीडिया वाले तुरंत अपने कैमरे उठा कर मंडी में पहुंच जाते हैं। मीडिया वाले कैमरे में कुछ शहरी महिलायो को दिखाते है, जो कैमरे के सामने मुस्कुरा के यही कहती नजर आती हैं, कि महंगाई बहुत बढ़ गई है, सरकार इसे कम क्यों नहीं करती? महंगाई से हमारे घर का बजट बिगड़ गया है।

मैे उन महिलायो से कहती हूँ, कि जरा कभी किसी किसान के घर में जाकर तो देखिये। उसके उगाए हुए अनाज से तुम्हारा पूरा किचन भरा होगा, पर शायद वो किसान रात को भी भूखे पेट सोया होगा। कभी उसके साथ खेत पर जाकर देखिये वो किस तरह काम करता है। उसका उगाया अनाज आप खाते हैं, लेकिन उसकी हालत देखकर कहेंगे, ये कितना गन्दा है। वो दवाई से भरी टंकी को अपने कंधो पर लादकर नंगे पैर पूरे खेतों में दवाई का छिङ़काव करता है। वो रात रात को जागकर जानवरों से फसल को बचता है, और फसल को पानी देता है। शायद जिस दिन आप अपनी आँखो से उनकी ये हालत देख लेंगी, आपको अपने किचन में रखे सामान की कीमत अधिक नजर नहीं आयेगी।

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